पंचांग के पाँच अंग कैसे निकाले जाते हैं
- तिथि: चंद्रमा और सूर्य के देशांतर का अंतर ÷ 12°। 1–15 शुक्ल पक्ष, 16–30 कृष्ण पक्ष (30 = अमावस्या)।
- नक्षत्र: चंद्रमा का निरयन (लाहिड़ी) देशांतर ÷ 13°20′ — 27 नक्षत्र।
- योग: सूर्य + चंद्र देशांतर का योग ÷ 13°20′ — विष्कम्भ से वैधृति तक 27 योग।
- करण: तिथि का आधा भाग (6°)। विष्टि करण को भद्रा कहते हैं।
- वार और सभी अंग सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के हिंदू दिन के लिए दिखाए जाते हैं; दिन में अंग बदले तो "फिर" के बाद अगला नाम और समाप्ति समय दिया है।
राहु काल, यमगंड, गुलिक और अभिजित
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल वार के अनुसार तय भाग होता है: सोमवार दूसरा, शनिवार तीसरा, शुक्रवार चौथा, बुधवार पाँचवाँ, गुरुवार छठा, मंगलवार सातवाँ और रविवार आठवाँ। यमगंड और गुलिक भी इसी तरह वार से तय भाग हैं।
अभिजित मुहूर्त दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ (दोपहर के आसपास) होता है; परंपरा से बुधवार को इसे नहीं लिया जाता। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से 96 से 48 मिनट पहले का समय है।
सटीकता: Drik Panchang से मिलान
सूर्योदय-सूर्यास्त वायुमंडलीय अपवर्तन सहित Swiss Ephemeris से निकलते हैं। अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 की 12 तारीख़ों पर लखनऊ के लिए सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल और तिथि-नक्षत्र-योग-करण के नाम व समाप्ति समय Drik Panchang से मिलाए गए: 84 में से 84 जाँचें 3 मिनट के भीतर मिलीं (सबसे बड़ा अंतर 1 मिनट)।
अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है (सूर्योदय की परिभाषा और अयनांश के कारण)। व्रत-त्योहार या संस्कार के लिए अपने कुल-पुरोहित की परंपरा मानें।
FAQ / अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज का पंचांग किस शहर के हिसाब से है?
डिफ़ॉल्ट रूप से लखनऊ के सूर्योदय के अनुसार। ऊपर दिए बटन या खोज से कोई भी शहर चुनें — सूर्योदय, राहु काल और दिन के अंगों का समय उसी शहर के लिए फिर से गणना होता है।
तिथि सूर्योदय से क्यों मानी जाती है?
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है, इसलिए सूर्योदय के समय चल रही तिथि उस दिन की तिथि मानी जाती है। अगर वह दिन में समाप्त हो जाए तो अगली तिथि का समय भी साथ में लिखा है।
आज राहु काल कब है?
27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में राहु काल 2:38 PM – 4:02 PM है। राहु काल में नया काम शुरू करने से परहेज़ की परंपरा है।
पूर्णिमांत और अमांत मास में क्या फ़र्क है?
उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है (पूर्णिमांत), जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अमावस्या के बाद (अमांत)। शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक होता है; कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत नाम एक महीना आगे रहता है।
यह पंचांग कितना सटीक है?
12 तारीख़ों पर लखनऊ के लिए Drik Panchang से 84 जाँचें की गईं; सभी 3 मिनट के भीतर मिलीं, सबसे बड़ा अंतर 1 मिनट रहा। फिर भी किसी संस्कार का समय अपने पंडित से पक्का करें।
पंचांग खगोलीय गणना है; शुभ-अशुभ समय पारंपरिक मान्यताएँ हैं। किसी संस्कार या बड़े निर्णय से पहले अपने पंडित से पुष्टि करें।