विवाह मुहूर्त किन नियमों से निकाला गया
- नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद और रेवती — ये 11 विवाह के शुभ नक्षत्र हैं। गंडांत (मघा व मूल का पहला चरण, रेवती का अंतिम चरण) छोड़ा गया।
- तिथि: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या और शुक्ल प्रतिपदा नहीं ली गईं।
- योग और करण: नौ अशुभ योग (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति) और भद्रा (विष्टि करण) का समय हटाया गया।
- सूर्य: मेष, वृषभ, मिथुन, तुला, वृश्चिक, मकर या कुंभ में। सूर्य धनु या मीन में हो तो खरमास, और जिस दिन संक्रांति हो वह पूरा दिन छोड़ा गया।
- चातुर्मास (देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक), अधिक मास और होलाष्टक में कोई मुहूर्त नहीं।
- गुरु और शुक्र अस्त नहीं होने चाहिए (सूर्य से गुरु 11°, शुक्र 10° से कम दूरी पर अस्त), और अस्त के 3 दिन पहले-बाद (वृद्धत्व/बाल्यत्व) भी छोड़े गए।
- लग्न: समय-खंड में वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला या धनु लग्न कम से कम 30 मिनट उदय हो। ये लग्न-समय अलग कॉलम में दिए हैं — फेरे इन्हीं में रखना श्रेष्ठ माना जाता है।
- हर समय-खंड कम से कम 1 घंटे का है और दोनों किनारों पर 5 मिनट छोड़े गए हैं। आधी रात के बाद का समय उसी तारीख़ में गिना गया है (हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक)।
दूसरे पंचांग से मिलान
हमारी हर तारीख़ Drik Panchang (लखनऊ) की विवाह सूची में भी है: नवंबर 2026 – दिसंबर 2027 की 72 में से 72 तारीख़ें मेल खाती हैं, और 73 में से एक को छोड़कर हर समय-खंड उनके समय के भीतर है।
Drik की सूची में कुछ और तारीख़ें भी हैं, क्योंकि हम रिक्ता तिथि, अशुभ योग और लग्न के नियम ज़्यादा सख़्ती से लगाते हैं। अलग-अलग पंचांगों (बनारसी, मिथिला, दक्षिण भारतीय) की सूचियाँ भी आपस में थोड़ी अलग होती हैं — इसलिए अंतिम निर्णय अपने पंडित से लें।
महीने-वार गिनती
नवंबर 2026: 4 · दिसंबर 2026: 6 · जनवरी 2027: 7 · फ़रवरी 2027: 8 · मार्च 2027: 7 · अप्रैल 2027: 6 · मई 2027: 9 · जून 2027: 11 · जुलाई 2027: 0 · अगस्त 2027: 0 · सितंबर 2027: 0 · अक्टूबर 2027: 0 · नवंबर 2027: 9 · दिसंबर 2027: 5
FAQ / अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में शादी के शुभ मुहूर्त कब से शुरू हैं?
देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) के बाद। लखनऊ के लिए पहला मुहूर्त 21 नवंबर 2026 को है। नवंबर-दिसंबर 2026 में कुल 10 मुहूर्त हैं।
खरमास में शादी क्यों नहीं होती?
जब सूर्य धनु या मीन राशि (गुरु की राशियाँ) में होता है उसे खरमास या मलमास कहते हैं; इस समय विवाह, गृहप्रवेश जैसे संस्कार नहीं किए जाते। 2026-27 में खरमास लगभग 16 दिसंबर 2026 – 14 जनवरी 2027 और 15 मार्च – 14 अप्रैल 2027 है।
2027 में चातुर्मास कब है?
देवशयनी एकादशी (13 जुलाई 2027 के आसपास) से देवउठनी एकादशी (9-10 नवंबर 2027) तक। इस बीच विवाह मुहूर्त नहीं होते।
क्या ये तारीख़ें हर शहर के लिए एक जैसी हैं?
तारीख़ें ज़्यादातर पूरे उत्तर भारत में लगभग वही रहती हैं, लेकिन समय सूर्योदय और लग्न पर निर्भर है, इसलिए यह सूची लखनऊ के हिसाब से है। दूसरे शहर में मिनटों का अंतर आ सकता है — अपने पंडित से पुष्टि करें।
क्या पंडित से पूछना ज़रूरी है?
हाँ। यह सूची सामान्य पंचांग नियमों से बनी है। वर-वधू की कुंडली, गुण मिलान, गुरु-चंद्र बल और कुल की परंपरा जैसी निजी बातें इसमें नहीं हैं — वे आपके पंडित ही देखेंगे।
शुभ लग्न का क्या मतलब है?
लग्न वह राशि है जो उस समय पूर्व दिशा में उदय हो रही होती है। विवाह के लिए वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला और धनु लग्न शुभ माने जाते हैं; तालिका में हर दिन के इन लग्नों का समय अलग दिया है।
लखनऊ के हिसाब से, अपने पंडित से पुष्टि करें। ये तारीख़ें Swiss Ephemeris (लाहिड़ी अयनांश) से शास्त्रीय नियमों पर गणना की गई हैं; व्यक्तिगत कुंडली या कुल-परंपरा इनमें शामिल नहीं।