सर्वाष्टकवर्ग का अर्थ और 337 बिंदुओं की समझ
सर्वाष्टकवर्ग क्या है?
सर्वाष्टकवर्ग (SAV) सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की सात भिन्नाष्टकवर्ग पंक्तियों का राशि अनुसार जोड़ है। हर राशि के लिए एक अंक मिलता है। इसे जीवन की निश्चित घटना का स्कोर या प्रतिशत न समझें।
कुल 337 क्यों?
सात ग्रहों के पारंपरिक स्थिर कुल क्रमशः 48, 49, 39, 54, 56, 52 और 39 हैं। इनका योग 337 है। जन्म समय बदलने पर बिंदुओं का वितरण बदल सकता है, लेकिन सही मूल तालिका का कुल वही रहता है। इसलिए सिर्फ 337 मिल जाना शुद्धता का पर्याप्त प्रमाण नहीं।
लग्न के बिंदु कहाँ हैं?
हर ग्रह-बिंदु पंक्ति में सात ग्रह और लग्न, आठ योगदानकर्ता हैं। लग्न का योगदान पहले ही गिना गया है। इस पद्धति में अलग लग्न पंक्ति SAV में जोड़ने पर कुल 337 नहीं रहेगा। राहु और केतु सात ग्रहों की ग्रह-बिंदु पंक्तियों में शामिल नहीं हैं।
ज़्यादा बिंदु का मतलब
30 या अधिक बिंदु को यहाँ तुलनात्मक सहयोग, 25–29 को संतुलित और 25 से कम को धैर्य व तैयारी की श्रेणी कहा जाता है। ये व्याख्यात्मक परंपराएँ हैं। कुंडली के भावेश और ग्रहों की स्थिति को साथ पढ़ना जरूरी है।
परंपरागत ज्योतिष, गारंटी नहीं।
गणना संदर्भ: BPHS tables (jyotishganit) · PyJHora
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